“कलयुग का असर अभी तक नहीं पहुँचा! वो जगह जहाँ 88,000 ऋषि तप करते थे – नैमिषारण्य की 10 अनसुनी बातें”

जब भी हम कलयुग की बात करते हैं, तो मन अपने-आप अशांति, पाप और अधर्म की ओर चला जाता है। लेकिन भाई, क्या आप जानते हो कि इस धरती पर आज भी एक ऐसी पवित्र जगह है जहाँ कलयुग का असर बहुत कम माना जाता है?
उत्तर है — नैमिषारण्य
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में बसी यह दिव्य भूमि सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की तपस्या, ज्ञान और ईश्वर कृपा का केंद्र रही है। आज मैं आपको नैमिषारण्य की 10 ऐसी अनसुनी बातें बताने जा रहा हूँ, जो आम लोग नहीं जानते।

1. जहाँ 88,000 ऋषियों ने एक साथ तप किया

शास्त्रों के अनुसार, नैमिषारण्य वही भूमि है जहाँ 88,000 ऋषियों ने एक साथ यज्ञ और तपस्या की थी। इतनी बड़ी संख्या में ऋषियों का एक जगह साधना करना, अपने आप में इस स्थान की दिव्यता को सिद्ध करता है।

कहा जाता है कि देवता भी यहाँ आकर ऋषियों की तपस्या देखने आते थे।

2. भगवान विष्णु का चक्र जहाँ रुका

पुराणों में वर्णन है कि देवताओं ने भगवान विष्णु से पूछा — “हे प्रभु, धरती पर सबसे पवित्र स्थान कौन सा है?”
भगवान विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र छोड़ा और कहा —
“जहाँ यह चक्र रुके, वही नैमिषारण्य होगा।”

वो चक्र यहीं आकर रुका — और तभी से इस स्थान का नाम पड़ा नैमिषारण्य

3. कलयुग का प्रभाव यहाँ सबसे कम माना जाता है

भाई, यही वजह है कि कहा जाता है —
नैमिषारण्य में किया गया जप, तप और दान कई गुना फल देता है।

यहाँ आने वाले भक्त आज भी महसूस करते हैं कि मन अपने-आप शांत हो जाता है, जैसे कोई अदृश्य शक्ति आपको थाम लेती हो।

4. चक्रतीर्थ – जहाँ पाप धुल जाते हैं

नैमिषारण्य का सबसे पवित्र स्थान है — चक्रतीर्थ
मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।

आज भी अमावस्या, पूर्णिमा और एकादशी पर यहाँ हजारों भक्त स्नान करने आते हैं।

5. वेद-पुराणों की रचना और कथा स्थल

यही वह भूमि है जहाँ:

  • पुराणों की कथाएँ सुनाई गईं
  • श्रीमद्भागवत कथा का विस्तार हुआ
  • सूतजी ने ऋषियों को धर्म और भक्ति का मार्ग बताया

यानी नैमिषारण्य केवल तीर्थ नहीं, बल्कि ज्ञान की जन्मभूमि भी है।

6. हनुमान जी आज भी यहाँ विराजमान हैं

नैमिषारण्य में स्थित लालिता देवी मंदिर और हनुमान गढ़ी से जुड़ी मान्यता है कि
हनुमान जी आज भी यहाँ साक्षात विराजमान हैं।

कई साधु-संत बताते हैं कि रात के समय यहाँ दिव्य अनुभूति होती है।

7. 84 कोसी परिक्रमा का आध्यात्मिक रहस्य

नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा की परीक्षा मानी जाती है।
जो श्रद्धा और नियम से यह परिक्रमा करता है, उसे जीवन की कई बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

8. यहाँ मृत्यु भी मोक्ष का द्वार मानी जाती है

शास्त्रों में कहा गया है कि
नैमिषारण्य में प्राण त्यागने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इसी कारण कई साधु-संत जीवन के अंतिम समय में यहाँ आकर साधना करते हैं।

9. आधुनिक युग में भी साधना जीवित है

आज के समय में भी यहाँ:

  • अखंड रामायण
  • भागवत सप्ताह
  • मौन साधना
  • हवन-यज्ञ

निरंतर चलते रहते हैं।
यह बताता है कि यह स्थान आज भी जीवित तीर्थ है, सिर्फ इतिहास नहीं।

10. जो एक बार गया, वो बार-बार लौटता है

भाई, यह कोई लिखी हुई बात नहीं, बल्कि भक्तों का अनुभव है।
जो एक बार सच्चे मन से नैमिषारण्य जाता है, उसका मन बार-बार वहीं खिंचता है।

जैसे यह भूमि खुद बुलाती हो।

अंतिम शब्द: “कलयुग का असर अभी तक नहीं पहुँचा! वो जगह जहाँ 88,000 ऋषि तप करते थे – नैमिषारण्य की 10 अनसुनी बातें”

नैमिषारण्य कोई घूमने की जगह नहीं है,यह अनुभव करने की भूमि है। अगर जीवन में कभी शांति, भक्ति और आत्मिक सुकून की तलाश हो तो एक बार नैमिषारण्य जरूर जाना।

हो सकता है, वहाँ जाकर आपको अपने जीवन के कई सवालों के जवाब मिल जाएँ।

🙏 जय श्री विष्णु | जय नैमिषारण्य 🙏

भक्तों यह भी जानें — नैमिषारण्य मे कौन कौन से भगवान हैं?

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